Friday, 26 February 2016

दिन विशेष- वीर सावरकर की पुण्यतिथि (26 FEBRUARY)-

दिन विशेष- वीर सावरकर की पुण्यतिथि (26 FEBRUARY)-
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Oleh

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 हेलो फ्रेंड्स,
यहाँ दिन विशेष (DIN VISHESH IN HINDI LANGUAGE) की माहिती दी गई हे, ये माहिती आपको आपका  सामान्य ज्ञान को बढ़ाने के लिए , शिक्षक मित्रो को कलासरूममें, शाला के नोटिस बोर्ड पर लगाने ये INFORMATION उपयोगी होगी|

  COMPETITIVE EXAMS (TET,TAT,RAILWAY,TALATI,PSI,GPSC,HTAT,SSC) में दिन विशेष का एक प्रश्न तो होता ही हे, उनको भी ये माहिती बहोत उपयोगी होगी|

           विनायक दामोदर सावरकर

भारतीय स्वंतंत्रता आन्दोलन के अग्रिम सेनानी और प्रखर राष्ट्रभक्त थे| हिन्दू विचारधारा विकसित करनेका श्रेय वीर सावरकर को ही मिलता हे|

प्रारम्भिक जीवन:

 महाराष्ट्र के भागुव गावमें  २३ मई १८८३ में जन्म| माता के नाम राधाबाई तथा पिता का न दामोदर पन्त सावरकर था| हाईस्कुल की शिक्षा के दरमियान ही विनायक ने स्थानीय युवको को संगठित करके ‘मित्र मेला’का आयोजन किया था| जिनका हेतु भारत को स्वंतंत्रता दिलाने के बारे में सोचना था| सावरकर जब नौ वर्ष के थे तब माता का अवसान हो गया और उनके सात वर्ष बाद पिता का अवसान हो
गया|

राजनीतिक जीवन:

-->१९०४ में उन्होंने ‘अभिनव भारत’ नामक क्रांतिकारी संगठनकी स्थापना की|
à१९०६ में बेरिस्टर बनने के लिए वे इंग्लेंड चले गये और वहा भी भारतीय छात्रों के साथ अंग्रेज शाशन के विरोधमें जुट गए|

-->१९०९ में सावरकर और उनके साथी मित्रो ने मिलकर लार्ड कर्जन पर हत्या के प्रयास किया लेकिन असफल रहे और बाद में सर वाईली को गोली मार दिया, उसी दोरान कलेक्टर जेक्सन को भी मारकर हत्या कर दी | सावरकर के सामने केस चला इसमें ५० वर्ष की आजी वन केद की सजा हुई बादमें रिहा कर दिया गया|

वीर सावरकर के बारेमे रोचक बाते:

--> सावरकर पहले ऐसे भारतीय विद्यार्थी थे जिन्होंने इंग्लेंड के राजा के प्रति वफ़ादारी की शपथ लेने से मन कर दिया था इनके फलस्वरूप उन्हें वकालत करने से रोक दिया गया था|

-->दुनिया के पहले ऐसे लेखक थे की उनकी पुस्तक ‘१८५७:भारतका प्रथम स्वातंत्र्य संग्राम’ जिनको दो-दो देशोने प्रकाशन से पहले ही प्रतिबंधित कर दिया था | प्रकाशन पहले प्रतिबन्धि होने वाला ये दुनिया का पहला पुस्तक था|

-->सावरकर विश्व का ऐसा स्वातंत्र्य वीर हे जिनको दो-दो बार आजीवन कारावास की सजा मिली, वो सजाको पूरी भी की और बाद में राष्ट्र की सेवा की |

-->राष्ट्रध्वज तिरंगेमे धर्मचक्र लगाने का सुजाव सर्वप्रथम वीर सावरकरने दिया था और राष्ट्रपति उसे मान लिया था|

-->वे पहले ऐसे स्नातक थे की स्वंत्रता आन्दोलनमें भाग लेने के कारण ब्रिटिश सरकारने स्नातक की उपाधि वापस लेली|

-->आज के दिन १९६६ में ,८२ साल की उम्र में उनका मृत्यु हुआ, इस भारत माता के सपूत को शत शत नमन.....
 
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लेखक-युवराज दियोरा-लेखक की परवानगी बिना ये लेख रिप्रोडूस नहीं किया जा सकता हे |
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Yuvraj Dihora

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